​ज्योतिर्मठ में तीन साल के इंतजार के बाद सुधार कार्य तेज

ज्योतिर्मठ : भू-धंसाव की त्रासदी झेल रहे ज्योतिर्मठ के लिए राहत की बड़ी खबर है। लगभग तीन वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नगर में भूमि स्थिरीकरण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। वैज्ञानिक संस्थानों की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

​प्रमुख क्षेत्रों में एंकरिंग और पाइलिंग का काम शुरू

​नवंबर माह में मारवाड़ी पुल से विष्णुप्रयाग पुल तक अलकनंदा नदी के तट पर सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू किया गया था। इसी कड़ी में अब नृसिंह मंदिर वार्ड में बद्रीनाथ धाम को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थिरीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। ​प्रशासन द्वारा चिह्नित कुल आठ संवेदनशील लोकेशंस में से ‘लोकेशन नंबर 7’ पर काम तेजी से चल रहा है। इस तकनीक के तहत सड़क से 27 मीटर ऊपर तक एंकरिंग की जा रही है। ​सड़क से 65 मीटर नीचे तक पाइलिंग और एंकरिंग के जरिए जमीन को मजबूती दी जा रही है। ​लगभग 350 मीटर लंबे स्लोप को सुरक्षित किया जा रहा है, जिससे ज्योतिर्मठ का मुख्य चौराहा, गुरुद्वारा और पीडब्ल्यूडी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।

​यात्रा सीजन से पहले 15 अप्रैल का लक्ष्य

​उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की आगामी यात्रा को देखते हुए 15 अप्रैल तक इस क्षेत्र में कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्य की गति बढ़ाने के लिए मौके पर 6 से 7 पाइल मशीनें तैनात की गई हैं, ताकि तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों को आवाजाही में कोई असुविधा न हो।

​स्थानीय निवासियों में जगी उम्मीद की किरण

​लंबे समय बाद शुरू हुए इन रक्षात्मक कार्यों से स्थानीय जनता ने संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय निवासी भगवती प्रसाद नंबूदरी, नीतीश चौहान, नितिन व्यास और राकेश भट्ट का कहना है कि इन कार्यों से भविष्य में जोशीमठ स्थिर होगा और भू-धंसाव की आफत से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा शुरू होने तक अधिकांश महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।

​ड्रेनेज और सीवर प्रोजेक्ट पर भी तैयारी

​भूमि स्थिरीकरण के साथ-साथ अब नगर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट यानी ड्रेनेज और सीवर सिस्टम पर भी काम शुरू होने वाला है। प्रशासन की टीम निर्माण संस्थाओं के साथ लगातार सर्वे कर रही है। माना जा रहा है कि एक बार प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम तैयार होने के बाद, जमीन के अंदर पानी के रिसाव को रोका जा सकेगा, जो भू-धंसाव का मुख्य कारण रहा है।

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